Tuesday, December 9, 2025

भाखड़ा-ब्यास डैम में पानी की स्थिति नियंत्रण में बीबीएमबी चेयरमैन

बीबीएमबी भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के चेयरमैन मनोज त्रिपाठी ने प्रेस वार्ता में कहा कि बोर्ड के तहत दो डैम संचालित होते हैं। इस बार पीछे से काफी अधिक पानी आया है।
उन्होंने बताया कि ब्यास नदी में इस बार पहले की तुलना में बहुत ज्यादा पानी आया है। ब्यास में इस बार 11.70 बीसीएम पानी आया, जबकि 2023 में 9.52 बीसीएम पानी आया था। इसी तरह भाखड़ा डैम में इस बार 9.11 बीसीएम पानी आया है, जो इससे पहले 1988 में दर्ज किया गया था।
चेयरमैन मनोज त्रिपाठी ने कहा कि पानी छोड़ने से पहले निचले इलाकों की स्थिति देखनी पड़ती है। इसके लिए एक कमेटी है जिसमें चारों राज्यों के मुख्य अभियंता शामिल होते हैं। ब्यास डैम से लगातार थोड़ा-थोड़ा पानी छोड़ा जा रहा है और संबंधित जिलों को पहले से जानकारी दी जाती है।
उन्होंने बताया कि यदि ये दोनों डैम न होते तो जून में ही बाढ़ आ जाती। बीबीएमबी से जब भी पानी छोड़ा जाता है, तो कमेटी की सहमति से फैसला होता है। साथ ही डैम की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि पानी के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए तीन अलग-अलग मौसम एजेंसियों अमेरिकी, यूरोपीय और भारतीय एजेंसी से डाटा लिया जाता है। नियम के अनुसार मानसून से पहले ब्यास डैम का लेवल 1301 फीट के आसपास रखा जाता है, लेकिन इस बार इसे इससे भी कम रखा गया। वहीं भाखड़ा डैम का स्तर राज्यों की मांग को देखते हुए 1301 फीट से नीचे नहीं ले जाया जा सका।
मनोज त्रिपाठी ने बताया कि भाखड़ा डैम पर सुरक्षा के लिए CISF की तैनाती कर दी गई है। डैम से निकाली जाने वाली गाद की नीलामी से हर साल सैकड़ों करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है। इस बार इसमें एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी भी शामिल होगी।
उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की कि वे डैम से जुड़ी नदियों को साफ रखें और पर्याप्त प्रबंध करें, क्योंकि जब डैम में ज्यादा पानी आता है तो पानी छोड़ना अनिवार्य हो जाता है।
चेयरमैन मनोज त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि भाखड़ा डैम पर उन्हें बंधक नहीं बनाया गया था, हालांकि काम करने से रोका गया था। उन्होंने कहा कि पानी छोड़ने का अधिकार केवल बीबीएमबी के पास है, क्योंकि भाखड़ा उनका स्ट्रक्चर है।
पानी के बंटवारे को लेकर उन्होंने कहा कि अप्रैल में जब हरियाणा और पंजाब के बीच मसला चल रहा था, तब डैम का स्तर 1550 फीट था। सभी राज्यों ने डैम में पानी बचाकर रखने का आग्रह किया ताकि बारिश कम होने पर भी कमी न हो। अगर उस समय हरियाणा को पानी दे दिया जाता तो डैम का स्तर 2-3 फीट नीचे आ जाता, लेकिन इस बार पानी अपेक्षा से ज्यादा आया।
हिमाचल प्रदेश में सभी प्रमुख जगहों पर वाटर लेवल मीटर लगाए गए हैं, जहां से लगातार डाटा प्राप्त हो रहा है।
अंत में चेयरमैन ने कहा कि डैम में अब स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की कोई बात नहीं है।
E-Paper
RELATED ARTICLES

Most Popular




More forecasts: oneweather.org