सितंबर को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आधिकारिक पत्र भेजकर नए निर्देश लागू कर दिए हैं।
मुख्याध्यापक को मिली नई जिम्मेदारी
नए आदेशों के मुताबिक, अब हर स्कूल का मुख्याध्यापक (हेडमास्टर) मिड-डे मील व्यवस्था का प्रमुख जिम्मेदार होगा। यदि वह चाहे तो किसी अन्य शिक्षक को इस काम की जिम्मेदारी सौंप सकता है। हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि दिव्यांग शिक्षकों को इस जिम्मेदारी से मुक्त रखा जाएगा।निदेशालय ने कहा है कि अब स्कूलों को बार-बार स्पष्टीकरण या अनुमति लेनेकी जरूरत नहीं है। मुख्याध्यापक को यह अधिकार होगा कि वह अपनी समझदारी और स्कूल की परिस्थितियों के आधार पर किसी भी योग्य शिक्षक को मिड-डे मील इंचार्ज बना सके।
क्यों लिया गया यह फैसला
शिक्षा विभाग के अनुसार, दिव्यांग शिक्षकों को यह जिम्मेदारी न सौंपने का निर्णय उनके शारीरिक और मानसिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। अक्सर देखा गया है कि मिड-डे मील व्यवस्था संभालने में प्रशासनिक और फील्ड स्तर पर लगातार भागदौड़ करनी पड़ती है। इस वजह से दिव्यांग शिक्षक अतिरिक्त दबाव महसूस करते थे। विभाग का मानना है कि इस फैसले से उन्हें राहत मिलेगी और वे केवल शैक्षणिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।
मिड-डे मील में बड़ा बदलाव: अब मिलेगा विविधतापूर्ण खाना
हरियाणा सरकार ने मिड-डे मील के मेन्यू में भी अहम बदलाव किए हैं। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बाद मौलिक शिक्षा विभाग ने मौसम और पोषण संतुलन को ध्यान में रखते हुए एक नया डाइट प्ला जारी किया है। इसके तहत
अब 18 व्यंजनों की सूची बनाई गई है।
इस सूची के मुताबिक, बच्चों को हर दिन अलग-अलग व्यंजन परोसे जाएंगे। विभाग का कहना है कि यह कदम बच्चों में पोषण की कमी को दूर करने और उन्हें संतुलित आहार उपलब्ध कराने की दिशा में बेहद उपयोगी साबित होगा।
कुक-कम-हेल्पर की व्यवस्था यथावत
मिड-डे मील पकाने और परोसने के लिए पहले की तरह स्कूलों में कुक-कम-हेल्पर की व्यवस्था जारी रहेगी। इन हेल्परों की जिम्मेदारी भोजन तैयार करने, बच्चों को परोसने और साफ-सफाई का ध्यान रखने की होगी। शिक्षक केवल प्रशासनिक निगरानी और गुणवत्ता की देखरेख करेंगे।
शिक्षा विभाग का सख्त निर्देश
निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अब कोई भी स्कूल अधिकारी बार-बार प्रश्न या अनुमति पत्र न भेजे। मुख्याध्यापक को पूरी छूट है और उन्हें ही अंतिम जिम्मेदारी निभानी होगी। विभाग का कहना है कि इस कदम से
स्कूल स्तर पर निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और मिड-डे मील व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
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