Monday, December 8, 2025

सड़कें नहीं, सियासी जलेबी – हर गड्ढे में छिपा है एक घोटाला

रायपुररानी, देवेन्द्र सिंह: मुख्यमंत्री उड़नदस्ता और एंटी करप्शन ब्यूरो जब भी बड़े घोटालों की जांच के लिए छापेमारी करते हैं, तो वह खबरें मीडिया की सुर्खियों में जगह बना लेती हैं। पर क्या कभी किसी ने सोचा है कि यह छापेमारी सड़कों के गड्ढों और घटिया निर्माण के मामले में क्यों नहीं होती? आखिरकार, ये गड्ढे सिर्फ सड़क पर नहीं, बल्कि सरकारी खजाने में भी बड़े-बड़े सुराख बना रहे हैं।

बता दें कि प्रदेशभर की सड़कों का हाल इतना खस्ता है कि नागरिकों के लिए यात्रा करना एक खतरनाक खेल बन चुका है। गड्ढों में डूबे रास्तों पर चलना किसी साहसिक चुनौती से कम नहीं है और फिर भी ठेकेदार और कंपनियाँ बड़े आराम से सरकारी धन का गबन कर रही हैं। क्या यह एक संयोग है या फिर जानबूझकर किया जा रहा काला काम। अब सवाल ये है कि इन ठेकेदारों और कंपनियों की सड़क-माफियाओं की करतूतों पर नकेल कब कसी जाएगी? क्या होगा जब इन भ्रष्टाचारियों के दफ्तरों पर उड़नदस्ता की रेड डालेगी और उनके काले धंधे उजागर होंगे? कहीं न कहीं तो इन गड्ढों के पीछे छुपे हैं एक बड़े घोटाले के तार, जिन्हें पूरी तरह से खंगालने की जरूरत है।

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सड़क ठेकेदारों ने अपनी जेबें तो भर लीं, लेकिन आम जनता की जान जोखिम में:

सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ सालों में जितने भी सड़क निर्माण के काम हुए हैं, उनमें से अधिकांश में घटिया सामग्री का इस्तेमाल और समय से पहले काम को पूरा करने का दबाव रहा है। इसने न सिर्फ सड़कों की गुणवत्ता पर असर डाला, बल्कि सरकारी फंड का भी बड़ा हिस्सा लूट लिया। ठेकेदारों ने अपनी जेबें तो भर लीं, लेकिन आम जनता की जान जोखिम में डाल दी। लेकिन क्या सरकार का ध्यान इन गड्ढों पर नहीं जाता? या फिर यह जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है ताकि बड़े खिलाड़ी अपने खेल खेल सकें? अब वक्त आ गया है कि प्रशासन इन गड्ढों में छुपे भ्रष्टाचार को उजागर करे।

रायपुररानी-नारायणगढ़ रोड पर दिखे काफिले के साथ धूल के गुब्बारे, खस्ताहाल सड़क से मुख्यमंत्री की गाड़ी भी परेशान:

इसी बीच बुधवार को मुख्यमंत्री और कुछ बड़े नेताओं का काफिला रायपुररानी से नारायणगढ़ की ओर जा रहा था। काफिले को रायपुररानी के त्रिलोकपुर मोड़ से लेकर नारायणगढ़ तक खड्डों में बने रास्तों से गुजरना पड़ा। काफिले के साथ धूल के गुब्बारे हवा में उड़ते रहे और सड़क की हालत देख कारों में बैठे लोगों के चेहरे पर भी चिंता की लकीरें साफ दिखीं। क्या इस खस्ताहाल सड़क से मुख्यमंत्री की गाड़ी भी परेशान हो रही है, तो आम जनता को कितनी तकलीफ हो रही होगी? अब यह सवाल उठता है कि जब सत्ता के बड़े खिलाड़ी खुद इन गड्ढों में फंसने लगे, तो क्या प्रशासन इसे लेकर कोई ठोस कदम उठाएगा या यह मुद्दा फिर से ठंडे बस्ते में चला जाएगा। फिलहाल अगर अब भी यह मुद्दा अनदेखा किया जाता है, तो सड़कों के इन गड्ढों की साजिशें कभी नहीं खुल पाएंगी और भ्रष्टाचार का यह खेल यूं ही चलता रहेगा। क्या जनता को इन गड्ढों से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी अब प्रशासन निभाएगा या फिर यह एक और बेमानी वादा होगा?

गोहना की जलेबी से सड़कों के गड्ढे तक: हरियाणा में भ्रष्टाचार की कड़वी सच्चाई

दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गोहना की प्रसिद्ध जलेबी को लेकर जो बयान दिया था, वह राजनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बन गया था। लेकिन अब हरियाणा की सड़कों के गड्ढे उसी गोहना की जलेबी से भी ज़्यादा मशहूर हो गए हैं। सड़कों के गड्ढे न केवल जनता के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं, बल्कि इन गड्ढों के पीछे छुपे बड़े भ्रष्टाचार के राज भी हैं। क्या यह सिर्फ संयोग है कि चुनावी वादों की तरह ही सड़क सुधार के वादे भी खोखले साबित हो रहे हैं। क्या सड़क ठेकेदारों की जेबें भरने के लिए जनता के खून-पसीने की कमाई को लूटा जा रहा है। राजनीतिक बयानबाजी और जलेबी की मिठास अब सड़कों के गड्ढों की कड़वाहट में बदल गई है और सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में कार्रवाई करेगा या यह मुद्दा भी एक और सियासी जलेबी के रूप में खत्म हो जाएगा?

सड़कों के गड्ढे नहीं, ये तो भ्रष्टाचार के गहरे कुएं हैं जिनमें हमारी मेहनत की कमाई डुबो दी जा रही है! क्या यही है मुख्यमंत्री के विकास का फॉर्मूला? गड्ढे गहरे होते जा रहे हैं और सरकार बस मुंह लटकाए बैठी है।——— संजय चौहान, जिलाध्यक्ष कांग्रेस पंचकूला

अरे जनाब क्या कहें! ये गड्ढे तो अब सियासी रणनीति का हिस्सा बन चुके हैं। पहले गोहना की जलेबी, फिर चुनावी वादे और अब ये गड्ढे सब कुछ एक ही सर्कस का हिस्सा लगता है। जिनके पास सड़क निर्माण का ठेका है, उनके पास राजनीति के जलेबी बनाने की पूरी कला है। क्या ये सड़कों के गड्ढे सिर्फ टायर की परफॉर्मेंस चेक करने के लिए हैं या फिर बड़े खेल के नतीजे का हिस्सा।———- अजय राजपूत, महासचिव किसान-मजदूर संगठन

अरे बाप रे! खुद मुख्यमंत्री का काफिला धूल में लुड़कते हुए जा रहा है। तो सोचिए, आम जनता की क्या हालत होगी। गड्ढे तो सरकारी भ्रष्टाचार के स्कूप की तरह हो गए हैं। हर सड़क में एक नया घोटाला और हर गड्ढे में छिपा है एक नया सियासी ट्विस्ट। सवाल ये है कि क्या अब भी सरकार सिर्फ बयानबाजी करगी या फिर इन गड्ढों में सड़ते भ्रष्टाचार को ताबड़तोड़ नष्ट करने का वक्त आएगा।——— सोनू हरयोली, समाजसेवी

ये गड्ढे सिर्फ सड़क पर नहीं, कानून पर भी चोट कर रहे हैं। ठेकेदार और अफसर जेल की हवा खाएँगे तो सड़कें अपने आप मजबूत हो जाएंगी।——- अशवनी नागरा, एडवोकेट
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