चंडीगढ़ दिनभर, अजीत झा: डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन सोसाइटी चंडीगढ़ ने नगर निगम के खिलाफ आज हल्लाबोल ही दिया| सैंकड़ो की संख्या में कर्मचारियों ने अपनी मांगो को लेकर आज सेक्टर 17 स्थित नगर निगम के एमओएच विभाग के दफ्तर के बाहर जमाकर नारेबाजी की|
यह प्रदर्शन डोर टू डोर गार्बेज कलेक्टर सोसाइटी चंडीगढ़ के प्रधान धर्मवीर राणा ने कहा कि कर्मचारियों की तीन वर्ष पुरानी जायज मांगों पर नगर निगम ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिस कारण वे संघर्ष और हड़ताल का रास्ता अपनाने को मजबूर हैं। सोसाइटी का आरोप है कि 1 जुलाई 2025 को भी मांग पत्र सौंपा गया था, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं हुई। धर्मवीर राणा के m के अनुसार निगम ने पिछले 4-5 सालों से कमर्शियल एरिया व गांवों में प्रॉपर्टी टैक्स और पानी के बिलों के जरिए करोड़ों रुपये वसूले हैं, लेकिन गारबेज कलेक्टरों को भुगतान नहीं किया गया।
मुख्य मांगें और आरोप
- एमओयू लागू न होना: कमर्शियल मार्केट और गांवों में काम कर रहे गारबेज कलेक्टरों के साथ कोई समझौता एमओयू नहीं किया गया।
- भुगतान में देरी: कलेक्टरों को हर बार 10 तारीख के बाद वेतन मिलता है, जिससे उनकी लोन की किस्त, बच्चों की फीस और घर का किराया चुकाने में दिक्कत होती है।
- वाहनों की बदहाल हालत: रिहायशी इलाकों में गारबेज उठाने वाली गाड़ियां 60-70 प्रतिशत खराब हालत में पड़ी हैं, जिससे काम करना मुश्किल हो गया है।
- सुरक्षा सामग्री की कमी: ग्लव्स, मास्क, बरसाती और रिसाइकल बैग देने में भी लापरवाही बरती जा रही है।
- वेलफेयर फंड का इस्तेमाल नहीं: 2021 में हुए MOU के अनुसार प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये वेलफेयर फंड के लिए निर्धारित थे, लेकिन अब तक एक भी किस्त कलेक्टरों को नहीं दी गई।
- जुर्माने की रकम का हिस्सा नहीं मिला: गीला और सूखा कचरा अलग न करने वाले हाउसहोल्ड पर लगाए गए जुर्माने की 50% राशि भी वेलफेयर फंड में जमा नहीं की गई।
- अपेक्स कमेटी न बनना: एम.ओ.यू. के अनुसार समस्याओं के समाधान के लिए बनाई जाने वाली सैनीटेशन कमेटी 2021 से अब तक गठित नहीं की गई।
- छुट्टियों का हक न मिलना: हर साल 12 छुट्टियों का प्रावधान होने के बावजूद छुट्टी करने पर गैरहाजिरी दर्ज की जाती है।
- 87 कलेक्टरों की सैलरी कटौती: बिना नोटिस दिए वेतन में कटौती की गई।
एक हफ्ते का अल्टीमेटम
धर्मवीर राणा ने साफ कहा है कि यदि एक हफ्ते के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वे हड़ताल पर चले जाएंगे। इससे शहर में कूड़ा उठाने की व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो सकती है।







