Monday, December 8, 2025

सीजीसी झंजेरी अब बना सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली अगली पीढ़ी के लिए नई सोच और नया विजन

चंडीगढ़: मोहाली क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक क्षण में, चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेजे, झंजेरी ने आधिकारिक रूप से अपने रूपांतरण की घोषणा की और अब इसे सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली के नाम से जाना जाएगा। यह अवसर संस्थान की 25+ साल की गौरवशाली यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।
एक कॉलेज से तकनीक-प्रधान, स्वायत्त विश्वविद्यालय बनने की इस यात्रा में संस्थान की अगली पीढ़ी को आकार देने के लिए संकल्पित हैं।यह बदलाव उद्योग-समेकित शिक्षा की दिशा में एक साहसिक रणनीतिक कदम है। सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली का लक्ष्य भारत को AI आधारित नवाचारों, टेक-फर्स्ट लर्निंग और इनोवेशन का केंद्र बनाना है।
आज जब 90% से अधिक स्नातकों को उभरते उद्योगों के लिए अनुपयुक्त माना जाता है, विश्वविद्यालय ने ऐसा पाठ्यक्रम तैयार किया है जो लाइव इंडस्ट्री एक्सपोज़र और कॉरपोरेट्स के साथ मिलकर बनाए गए सर्टिफिकेशन पर आधारित है। शिक्षा का यह इकोसिस्टम 50:50 लर्निंग मॉडल पर बना है, जिसमें आधी जिम्मेदारी फैकल्टी और आधी जिम्मेदारी इंडस्ट्री विशेषज्ञों की होगी। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल नौकरियों के लिए नहीं, बल्कि तेजी से बदलती डिजिटल इकोनॉमी में नेतृत्व के लिए तैयार करना है।
इस कॉन्फ्रेंस में शिक्षा और उद्योग जगत के कई बड़े नाम मौजूद रहे। एस. रशपाल सिंह धालीवाल, संस्थापक कुलपति, सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली अरश धालीवाल, मैनेजिंग डायरेक्टर, डॉ. सुशील प्रशार, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, DCPD कॉरपोरेट और टेक्नोलॉजी सेक्टर से भी दिग्गज हस्तियां शामिल हुईं, जिनमें प्रमुख रहे। गगन अग्रवाल, इंडिया अमित चौधरी, टेक्निकल डायरेक्टर, इंडिया आनंद अखौरी, डायरेक्टर, इंडिया अशुतोष कुमार, वाइस प्रेसिडेंट, हर्ष छाबड़ा, हेड ऑफ लर्निंग एंड डेवलपमेंट पार्टनर अहमद खालिद, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, एस. रशपाल सिंह धालीवाल ने कहा यह विश्वविद्यालय समाज के प्रति मेरी प्रतिबद्धता है। मैं हमेशा मानता हूं कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कुछ चुनिंदा लोगों का विशेषाधिकार नहीं होनी चाहिए। यह हर व्यक्ति का अधिकार है। सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली इसी वादे पर खड़ी है कि हर छात्र, चाहे उसका बैकग्राउंड कुछ भी हो, सीखने, बढ़ने और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर पाए।”
मैनेजिंग डायरेक्टर अरश धालीवाल ने अपने विचार रखते हुए कहा– “अमेरिकी शिक्षा प्रणाली से प्रेरित होकर मैंने देखा कि इंडस्ट्री और अकादमिक का समन्वय ही वैश्विक स्तर पर सफल संस्थानों की नींव है। इसी सोच से हमने इंडस्ट्री-इंटीग्रेटेड लर्निंग कैपिटल ऑफ इंडिया के रूप में सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली की कल्पना की। हमारा लक्ष्य छात्रों को ऐसा टेक-सक्षम और भविष्यवादी पाठ्यक्रम देना है जो इनोवेशन, इंडस्ट्री और एम्प्लॉयबिलिटी की भाषा बोलता हो।”
उन्होंने आगे यह भी घोषणा की – “हम छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ पेड इंटर्नशिप भी देंगे, जिनमें न्यूनतम 75,000 से 1,00,000 तक का स्टाइपेंड होगा। इससे छात्रों को शिक्षा के दौरान ही वित्तीय स्वतंत्रता मिलेगी।”
डॉ. सुशील प्रशार, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, DCPD ने 50:50 लर्निंग मॉडल का परिचय दिया। उन्होंने कहा– “इस मॉडल में आधी पढ़ाई सीईओ, उद्यमियों और इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स द्वारा और बाकी आधी फैकल्टी द्वारा कराई जाएगी। इससे छात्रों को किताबों के साथ-साथ बोर्डरूम, लाइव प्रोजेक्ट्स और केस स्टडीज से भी सीखने का अवसर मिलेगा। यही तरीका उन्हें कल के प्रॉब्लम-सॉल्वर, थिंकर और डूअर बनाएगा।”
सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली ने ग्रामीण–शहरी स्किल गैप को दूर करने के लिए डिजिटल और व्यावसायिक शिक्षा को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने का संकल्प लिया है। इसका उद्देश्य टियर-2 और टियर-3 शहरों के फ्रीलांसर और गिग-इकोनॉमी प्रोफेशनल्स को सक्षम बनाना है। छात्र सोशल इम्पैक्ट कैंपेन चलाएंगे और स्टार्टअप्स को इंडस्ट्री मेंटर्स की मदद से विकसित करेंगे। विश्वविद्यालय भारत के 6.8 लाख करोड़ MSME सेक्टर को भी डिजिटल और मार्केटिंग सपोर्ट उपलब्ध कराएगा।
यह विश्वविद्यालय NEP 2020 के लक्ष्यों और भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं जैसे– स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया के अनुरूप कार्य करेगा और वैश्विक कंपनियों के लिए टैलेंट पाइपलाइन बनाकर भारत को नॉलेज इकोनॉमी में अग्रणी बनाएगा।
25 वर्षों की मजबूत विरासत और भविष्य के लिए साहसिक विजन के साथ सीजीसी यूनिवर्सिटी, मोहाली यह वादा करती है कि वह अगली पीढ़ी को फ्यूचर-रेडी, टेक-इनेबल्ड और ग्लोबली कॉम्पिटिटिव बनाएगी।
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