पंचकूला पुलिस ने सतर्कता और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए चार नाबालिग बच्चों को सुरक्षित उनके परिजनों से मिलवाया। पुलिस कमिश्नर शिवास कविराज के मार्गदर्शन और डीसीपी सृष्टि गुप्ता के नेतृत्व में अमरावती चौकी की टीम ने यह मानवीय कार्य करते हुए समाज के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया।
डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने बताया कि 17 अगस्त की शाम करीब 7 बजे कालका-शिमला हाईवे स्थित रामपुर सुउडी गांव के पास एक ढाबा संचालक ने पुलिस को सूचना दी कि चार नाबालिग बच्चे असमंजस की स्थिति में भटक रहे हैं। सूचना मिलते ही ईआरवी-525 की टीम इंचार्ज रमेश के नेतृत्व में मौके पर पहुंची और बच्चों को सुरक्षित अपनी अभिरक्षा में लेकर अमरावती चौकी ले जाया गया।
चौकी इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर प्रीतम सिंह ने बच्चों से पूछताछ की तो पता चला कि सभी बच्चे 12 से 14 वर्ष की आयु के हैं और करनाल जिले के रहने वाले हैं। घरवालों को बिना बताए शिमला घूमने निकलने के कारण वे रास्ता भटक गए। उनके पास मोबाइल फोन नहीं था और न ही वे अपने परिजनों के नंबर याद कर पा रहे थे। इस पर चौकी इंचार्ज ने तुरंत करनाल पुलिस से संपर्क कर परिजनों को सूचित किया।
रात करीब 11:30 बजे बच्चों को सुरक्षित उनके परिजनों को सौंप दिया गया। बच्चों को पाकर परिजनों ने राहत की सांस ली और पंचकूला पुलिस का आभार व्यक्त किया। डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने इस पूरे प्रकरण में तत्परता से कार्रवाई करने के लिए अमरावती चौकी और ईआरवी-525 की टीम की सराहना की और कहा कि पंचकूला पुलिस नागरिकों की सुरक्षा और भलाई के लिए हमेशा समर्पित है।







